![]()
बुलंदशहर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई है, जहां इंसानियत ने धर्म की सीमाओं को मिटा दिया। कोतवाली नगर क्षेत्र में दो दिन पहले भारी बारिश के दौरान नाले में बह गई कक्षा 4 की छात्रा चारू कश्यप की तलाश जारी है। बच्ची की सलामती और उसे ढूंढने के प्रयासों की सफलता के लिए नगर की उमर फारूक मस्जिद में शाम 4 बजे की नमाज के बाद सभी नमाज़ियों ने हाथ उठाकर अल्लाह से दुआएं मांगीं। घटना को 48 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मासूम चारू का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC) के गोताखोर लगातार बच्ची की तलाश में जुटे हुए हैं। मस्जिद के मौलाना और वहां मौजूद नमाज़ियों ने बच्ची के न मिलने पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की। एक नमाजी ने कहा, हमने अल्लाह ताला से दुआ की है कि बच्ची जल्द से जल्द मिल जाए, ताकि दर-दर भटक रहे उसके परिवार के बेहाल दिल को थोड़ा सब्र मिल सके। नमाजियों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मानवीय संवेदना दिखाते हुए अपील की है। उन्होंने मांग की कि चारू का परिवार बेहद गरीब है और इस दुखद घड़ी में सरकार को आगे आकर पीड़ित परिवार को कम से कम ₹1 करोड़ का मुआवजा देना चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक संबल मिल सके। चारू कश्यप के लिए मस्जिद में की गई इस विशेष दुआ की खबर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैलते ही पूरे बुलंदशहर में लोग इस अनोखी हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे की सराहना कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किसी मासूम के दर्द और दुख के सामने मजहबी दीवारें बेमानी हो जाती हैं।
Source link