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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में ब्रेन सर्जरी की आधुनिक तकनीकों पर मंथन हुआ। कार्यशाला में आए विशेषज्ञों ने बताया कि जिस तरह दिल (हार्ट) का इलाज होता है, उसी तर्ज पर अब दिमाग की सर्जरी भी महज एक पतले तार और क्वाइल की मदद से बिना किसी बड़े चीर-फाड़ के की जा सकती है। ब्रेन में जमा खून का थक्का निकालना हुआ आसान कार्यशाला के दौरान कंप्यूटर बेस्ड सिमुलेशन के जरिए मानव शरीर पर इंडोवैस्कुलर तकनीक से ब्रेन सर्जरी का लाइव प्रदर्शन किया गया। जीएसवीएम के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रदीप जायसवाल ने बताया कि सालों पहले ब्रेन सर्जरी में काफी जोखिम (रिस्क फैक्टर) रहता था। हालांकि, अब इंडोवैस्कुलर तकनीक की मदद से एक बेहद पतले तार के जरिए सीधे दिमाग तक पहुंचा जाता है। इस तार की मदद से वहां जमे खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) को बहुत आसानी से और सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया जाता है। डॉक्टरों ने अपनी शंकाओं को दूर करने के लिए विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब भी किए। सुपर स्पेशियलिटी में जल्द शुरू होगी सुविधा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के प्रभारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि इस अत्याधुनिक इंडोवैस्कुलर तकनीक से बहुत जल्द अस्पताल में मरीजों का इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इससे कानपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। युवाओं में स्ट्रोक का बड़ा कारण, स्मोकिंग और बदलती लाइफस्टाइल दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल से आईं डॉ. श्रुति ने रविवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में युवाओं की सेहत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल की युवा पीढ़ी में स्मोकिंग (धूम्रपान) का चलन काफी बढ़ गया है, साथ ही उनकी दिनचर्या और लाइफस्टाइल में भी बड़ा बदलाव आया है। इसी वजह से युवा कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि युवाओं में स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा) होने के पीछे स्मोकिंग और खराब जीवनशैली एक बहुत बड़ा कारण बन रही है, जिस पर युवाओं को समय रहते ध्यान देने की जरूरत है।
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