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मुज़फ़्फ़रनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती से रविवार को किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का संकेत दे दिया। मुज़फ़्फ़रनगर में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक देशभर के करीब 50 किसान संगठनों की संयुक्त बैठक में “भारत बचाओ मोर्चा” के गठन का ऐलान किया गया। बैठक में प्रस्तावित भारत-अमेरिका (इंडो-अमेरिका) ट्रेड डील का तीखा विरोध करते हुए इसे किसानों और पशुपालकों के हितों के खिलाफ बताया गया। साथ ही 15 जुलाई को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन और 21 जुलाई को दिल्ली किसान घाट पर विशाल शक्ति प्रदर्शन की घोषणा की गई। रुड़की रोड स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अवनीत पंवार के आह्वान पर हुई। बैठक में विभिन्न राज्यों से पहुंचे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से “भारत बचाओ मोर्चा” के गठन का समर्थन किया और किसान, मजदूर तथा आम जनता के मुद्दों पर संयुक्त संघर्ष का संकल्प लिया। बैठक को संबोधित करते हुए चौधरी अवनीत पंवार ने कहा कि देश का किसान लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा और कृषि क्षेत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी किसान और सामाजिक संगठन एक मंच पर आकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करें। बैठक में सबसे अधिक चर्चा प्रस्तावित इंडो-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर हुई। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने दावा किया कि यदि भारत सरकार यह समझौता करती है तो सबसे बड़ा नुकसान देश के किसानों और पशुपालकों को होगा। उनका कहना था कि विदेशों से सस्ता मिल्क पाउडर और अन्य कृषि उत्पाद भारत में आने लगे तो स्थानीय किसानों का दूध और कृषि उत्पाद बाजार में टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 15 जुलाई को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जबकि 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर सभी सहयोगी संगठनों के साथ विशाल शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही “भारत बचाओ मोर्चा” की अगली रणनीतिक बैठक 14 जुलाई को बुलंदशहर में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।



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