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बलरामपुर के स्वशासी संयुक्त जिला चिकित्सालय में गुणवत्ता प्रबंधक रुचि पांडेय की कार्यप्रणाली विवादों में घिर गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) द्वारा उन्हें तत्काल हटाने की संस्तुति के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। सीएमओ ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। जांच शुरू होते ही अस्पताल से जुड़े पुराने मामलों और अभिलेखों की भी समीक्षा की जा रही है। यह मामला नया नहीं है, बल्कि पूर्व में भी गुणवत्ता प्रबंधक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी श्रुति के अस्पताल निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था, प्रशासनिक अव्यवस्था और गुणवत्ता प्रबंधन में कई खामियां सामने आई थीं। उस समय गुणवत्ता प्रबंधक की सेवाएं समाप्त करने की संस्तुति महानिदेशक स्तर तक भेजी गई थी, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका था। इसी क्रम में, उसी वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया था। उन्होंने भी गुणवत्ता प्रबंधक के संबंध में सेवा समाप्ति का प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। वर्तमान सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, गुणवत्ता प्रबंधक रुचि पांडेय ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ द्वेषपूर्ण भावना से शिकायत की गई है। पांडेय के अनुसार, जनवरी से उन्हें सीएमओ कार्यालय से संबद्ध किया गया है, और वह उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार वहीं उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, साथ ही संयुक्त जिला चिकित्सालय में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। रुचि पांडेय ने अस्पताल के सीएमएस और रेडियोलॉजिस्ट पर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें वीआईपी दौरे और विभिन्न निरीक्षणों के दौरान फील्ड ड्यूटी पर भी भेजा जाता रहा है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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