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कानपुर के जाजमऊ में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से 40 वर्षीय संविदाकर्मी संदीप की मौत के बाद मंगलवार की दोपहर 2 बजे परिजनों ने केस्को कार्यालय के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया। वाजिदपुर स्थित संजय नगर केस्को कार्यालय के सामने करीब दो घंटे तक चले इस हंगामे के दौरान परिजनों ने केस्को और कार्यदायी संस्था के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों ने बताया कि संदीप हेल्पर के रूप में काम करता था। आरोप है कि 29 जून की दोपहर वाजिदपुर के आई.ए रिसॉर्ट के पास एक लाइनमैन ने संदीप को जबरन बिजली का फ्यूज जोड़ने के लिए पोल पर चढ़ा दिया था। इसी दौरान लापरवाही के कारण लाइन में करंट दौड़ गया और संदीप 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। उसे तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 10 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। मंगलवार को संदीप का शव घर पहुंचते ही परिजनों ने न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर केस्को कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क पर शव रखे जाने से क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। मौके पर पहुंची कार्यदायी संस्था दिव्या के सुपरवाइजर सतीश कुमार ने परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, पीएफ और पेंशन सहित अन्य देय सुविधाएं दिलाने का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद परिजन शांत हुए और उन्होंने धरना समाप्त कर दिया। सतीश ने बताया कि, तत्काल 50 हज़ार और बुधवार को एमडी ऑफिस में 9.50 लाख की चेक पत्नी को दी जाएगी। मृतक संदीप अपने पीछे पत्नी तारादेवी, बेटे आदर्श और बेटी आकांक्षा को छोड़ गए हैं। परिवार का आरोप है कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता और लाइन बंद कराकर काम कराया जाता तो संदीप की जान बच सकती थी। फिलहाल, इस मामले में जिम्मेदारी तय किए जाने और आगे की कार्रवाई की मांग की जा रही है।



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