Sorting by

×




गोंडा के गांधी पार्क टाउन हॉल में आज बुधवार को हिंदी साहित्य अकादमी भारत और फुलवारी पब्लिक स्कूल द्वारा एक भव्य काव्य अनुष्ठान एवं साहित्यकार सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दो चरणों में सुबह 11 बजे से शाम 5:30 बजे तक चला इस कार्यक्रम में कुल 51 युवा रचनाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जबकि 14 दिवंगत साहित्यकारों के नाम पर उन्हें सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम दो चरणों में संपन्न हुआ। प्रथम चरण का शुभारंभ गोंडा सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह और हिंदी साहित्य अकादमी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांति कवि सौरभ जैन “सुमन” ने किया। इस चरण में विभिन्न क्षेत्रों से आए 30 युवा रचनाकारों ने पांच-पांच मिनट तक अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। दूसरे चरण में कवयित्री डॉ. नीता सिंह, कवि विनय शुक्ला और चंदन उपस्थित रहे। इस चरण में 21 युवा रचनाकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम के दौरान, डॉ. नीता सिंह ने सभी 51 युवा रचनाकारों को 14 स्मृतिशेष साहित्यकारों के नाम पर मोमेंटो देकर सम्मानित किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा रचनाकारों को प्रतिष्ठित कवियों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करना था। इस अवसर पर कवि विनय शुक्ला ने नोएडा हादसे का जिक्र करते हुए अपनी कविता प्रस्तुत की है। उन्होंने कहा, “सूख गई अंबर की छाती, धरा पिघलते देख लिया, हमने अपनी आंखों से अपनी चिता को जलते देख लिया। देख लिया सावन-भादों, हर पतझड़ हमने देख लिया, एक जुआ ज़िंदगी ने खेला, हर पत्ता हमने फेंक दिया। ना सनम मिला, ना ख़ुदा मिला, ना ही कोई सुनवाई थी, सुनो, आज फिर से तुम्हारी याद आई थी।” हिंदी साहित्य अकादमी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष क्रांति कवि सौरभ जैन “सुमन” ने भी अपनी प्रसिद्ध कविता ‘इतिहास’ सुनाकर युवा रचनाकारों का स्वागत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पाठ्यक्रमों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। इतिहास में जो हुआ वह विद्यार्थियों,जनता को सही ओर सत्य रूप में ही पढ़ाया जाना चाहिए गलत तरीके से लोगों को इतिहास के बारे में जानकारी न दी जाए बच्चों को न दी जाए। मुग़लों के आतंक को इतिहासों से हटा कर उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बताया जो की पूरी तरीके से गलत है। इससे हमारे देश की नींव कमज़ोर होती हैं। हमें वास्तविकता पता होनी चाहिए जिससे आने वाले समय में भी हमारी पीढ़ियां सचेत रह सकें हमारे आने वाली पीढियां को गलत जानकारी ना रहे। कार्यक्रम के समापन के दौरान डॉ सूर्यपाल सिंह को तुलसी रत्न सम्मान, डॉक्टर शैलेंद्र नाथ मिश्र को स्वर्गीय छोटेलाल दीक्षित स्मृति सम्मान, रामकरण मिश्रा सैलानी को अदम गोंडवी स्मृति सम्मान, विनोद सिंह कलहंस को गंगा बाबू स्मृति सम्मान, कमल आग्रेय को चंडी दत्त शुक्ला युवा साहित्यकार सम्मान, मनोज मिश्रा कप्तान को सतीश आर्य स्मृति सम्मान, प्रदीप मिश्रा को बदरी नारायण चौधरी प्रेम धन स्मृति सम्मान, हीरा सिंह मधुर को महात्मा बना दास स्मृति सम्मान, शिवाकांत विद्रोही को उदय प्रताप सिंह धीर स्मृति सम्मान, सुरेंद्र सिंह झंझट को विश्वनाथ सिंह विकल स्मृति सम्मान, राजेश ओझा को अनीराय स्मृति सम्मान, डॉक्टर ओमप्रकाश मिश्र को कृष्ण चंद्र हैरत स्मृति सम्मान और धीरज श्रीवास्तव को जगन्नाथ त्रिपाठी स्मृति सम्मान, याकूब अज्म गोंडवी को असग़र गोंडवी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *