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कासगंज में छह साल पुराने हत्या के एक मामले में न्यायालय एफटीसी-1 ने मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में चार अन्य आरोपियों को भी तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास से दंडित किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला 26 अप्रैल 2020 को थाना कासगंज में दर्ज किया गया था। वादी ने आरोप लगाया था कि ग्राम नगला शीशम निवासी परमवीर, रिंकू, सोमवीर, हरी सिंह और उर्मिला ने मिलकर उसकी बहन की हत्या कर दी थी। इस संबंध में थाना कासगंज में धारा 147, 302 और 201 भादवि के तहत मुकदमा संख्या 294/2020 दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पुलिस ने साक्ष्य संकलित कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ अभियान के तहत कासगंज पुलिस ने इस मामले में प्रभावी पैरवी की। पुलिस अधीक्षक ओ.पी. सिंह के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार के नेतृत्व में थाना कासगंज पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन कार्यालय ने लगातार पैरवी की। न्यायालय में साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए अभियोजन अधिकारी संदीप मिश्रा, विवेचक निरीक्षक प्रेम निवास शर्मा और कोर्ट पैरोकार हेड कांस्टेबल राजेश कुमार ने न्यायालय में मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप, 8 जुलाई 2026 को न्यायालय ने मुख्य आरोपी परमवीर को दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सह-अभियुक्त रिंकू, सोमवीर, हरी सिंह और उर्मिला को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। कासगंज पुलिस ने इस फैसले को ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ के तहत उत्कृष्ट विवेचना, सशक्त मॉनिटरिंग और प्रभावी अभियोजन का परिणाम बताया। पुलिस ने कहा कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई इसी प्रकार जारी रहेगी।
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