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मथुरा में साइबर फ्रॉड के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान पुलिस की जांच में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर थाना पुलिस द्वारा की गई जांच में स्टेट बैंक के 3 ऐसे खाते मिले जिसमें साइबर ठगों ने 15 करोड़ रुपए मंगाए। यह खाते ट्रस्ट के नाम से खोले गए थे। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने 2 मुक़दमे दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। म्यूल खाता की जांच में सामने आया मामला साइबर थाना पर तैनात उप निरीक्षक राजकुमार पवार ने साइबर फ्रॉड के मामले में जब जांच शुरू की तो उनकी नजर स्टेट बैंक के म्यूल खातों पर गई। जांच में पता चला भारतीय स्टेट बैंक की अलग अलग शाखा में 3 ट्रस्ट के नाम से करंट खाता खोले गए। 2025 में खोले गए इन खाता का इस्तेमाल म्यूल खातों के रूप में प्रयोग कर साइबर फ्रॉड की राशि को ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। इन खातों में 15 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की गई थी। इन ट्रस्ट के नाम से खुले खाते पुलिस जांच में सामने आया कि जन कल्याण सेवा ट्रस्ट, सहयोग पब्लिम फाउंडेशन के नाम से 3 खाता खोले गए थे। जांच के बाद पता चला कि दो खातों में 13 करोड़ 49 लाख रुपए व एक खाता में एक करोड़ 17 लाख रुपए साइबर फ्रॉड की धनराशि ट्रांसफर कराकर आर्थिक लाभ विभिन्न माध्यम से लिया गया। इन बैंक खातों के विरुद्ध NCRP पोर्टल पर पूरे भारत से बहुत अधिक शिकायतें होना जांच में मिली। पुलिस ने दर्ज की FIR साइबर थाना पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि इसके पीछे मथुरा के रहने वाले पंकज कुमार,वीरेंद्र कुमार और प्रयागराज के रहने वाले अंकित त्रिपाठी का नाम है। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ धारा 318 (4), 61 (2), 3(5) और आई टी एक्ट की धारा 66D में मुकद्दमा दर्ज कर लिया। इनके अलावा दो और आरोपी संदीप कुमार और धर्मेंद्र सिंह के नाम भी पुलिस को जांच में पता चले। इनके खिलाफ भी धारा 318 (4), 61 (2), 3(5) और आई टी एक्ट की धारा 66D में मुकद्दमा दर्ज कर लिया। पंकज और उसके साथी एक खाता पर सील लगने के बाद दूसरा खाता खुलवा लेते थे।
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