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सुल्तानपुर शहर के शाहगंज मोहल्ले स्थित मरहूम हाजी दिलशाद हुसैन के इमामबाड़े से सोमवार शाम चेहल्लुम का 19वां जुलूस निकाला गया। जुलूस में अंजुमनों ने नौहा और मातम कर हजरत इमाम हुसैन तथा कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना असकरी खान के मजलिस संबोधन से हुई। मौलाना ने इमाम हुसैन की शहादत पर डाला प्रकाश मौलाना असकरी खान ने अपने संबोधन में कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत पूरी दुनिया के लिए सत्य, इंसाफ और कुर्बानी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न समुदायों के लोग भी इमाम हुसैन के प्रति सम्मान और आस्था रखते हैं। उन्होंने अपने धार्मिक संबोधन में कर्बला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी को आज भी दुनिया भर में याद किया जाता है। उन्होंने अरबाईन और कर्बला में होने वाली जायरीन की बड़ी संख्या का भी जिक्र किया।
अंजुमनों ने किया नौहा और मातम जुलूस में अंजुमन जीनतुल अजा (रजिस्टर्ड) अलीगढ़-अमहट और अंजुमन गुन्चए मजलूमिया, शहर सुल्तानपुर के सदस्यों ने नौहे पढ़े और मातम किया। धार्मिक माहौल के बीच बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए। जुलूस विभिन्न मार्गों से होकर गभड़िया स्थित इमामबाड़ा हादी साहब पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। पूरे मार्ग पर शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर कोतवाली पुलिस तैनात रही।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद मजलिस से पूर्व शफाअत हुसैन ने सोजखानी की, जबकि शेर अली और जिया मेहदी ने पेशखानी की। इस अवसर पर हाशिम रजा, आबिद रजा, शबीह हैदर, शाहिद हुसैन सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
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