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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि निजी यूनिवर्सिटी मुनाफे के लिए नहीं चल सकतीं। उनका उद्देश्य शिक्षा के बड़े सार्वजनिक हित की सेवा करना होना चाहिए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छह हफ्ते में ऑडिटेड खातों की जानकारी देने का आदेश दिया। इसमें सरप्लस आय, खर्च, फीस कलेक्शन और कर्मचारियों की सैलरी का ब्योरा शामिल है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एडमिशन, भर्ती और पढ़ाई के स्तर से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि इन संस्थानों को केवल कमाई के उद्योग की तरह चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह आदेश एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में दिया गया है। इसमें एक छात्रा ने कॉलेज रिकॉर्ड में नाम बदलने की मांग की थी, जिसके बाद उसे कथित तौर पर परेशान किया गया। खबर अपडेट हो रही है…
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