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सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार को एक बार फिर बढ़ने लगा, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। बीते 24 घंटे में नदी का जलस्तर 12 सेंटीमीटर बढ़कर 84.36 मीटर से 84.48 मीटर पर पहुंच गया है। हालांकि, नदी अभी भी खतरे के निशान 85.56 मीटर से 1.08 मीटर नीचे बह रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही यह बढ़ोतरी मांझा क्षेत्र के कई निचले इलाकों में दोबारा पानी फैलने का कारण बन रही है। जलस्तर में वृद्धि का सीधा असर कम्हरिया घाट स्थित धर्मशाला पर देखा गया, जहां नदी का पानी उसकी सीढ़ियों तक पहुंच गया है। इस स्थिति ने आसपास के ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो मांझा क्षेत्र के निचले इलाकों में जल्द ही बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होगा। नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए, प्रशासन ने कटान प्रभावित क्षेत्रों में भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। विशेष रूप से मांझा क्षेत्र के इटौरा ढोलीपुर गांव के पूर्वी हिस्से में संभावित भूमि कटाव को रोकने के लिए व्यापक बचाव कार्य शुरू किए गए हैं। बाढ़ कार्य खंड अयोध्या ने इन संवेदनशील स्थलों पर बचाव कार्यों को तेज कर दिया है ताकि किसी भी बड़े नुकसान से बचा जा सके। विभाग की ओर से अब तक कटान प्रभावित स्थल पर 10 स्थानों पर बंबू क्रेट लगाए जा चुके हैं। इन बंबू क्रेट्स का मुख्य उद्देश्य नदी की तेज धार से होने वाले भूमि के कटाव को रोकना और तटबंधों को सुरक्षित रखना है। यह कार्य नदी के किनारे रहने वाले समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। जिला प्रशासन सरयू नदी के जलस्तर पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त उपाय भी किए जाएंगे।
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