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उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर चलाए जा रहे अभियानों और सरकारी योजनाओं का बड़ा असर धरातल पर नजर आने लगा है। ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और मजबूत कानून-व्यवस्था के बल पर राज्य में महिला अपराधों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, कन्या सुमंगला और सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं के माध्यम से लाखों महिलाओं व बालिकाओं को सीधे वित्तीय सहायता पहुंचाई गई है। रेप की घटनाएं 58% और दहेज हत्या 43% घटी राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रभावी कदमों से संगीन अपराधों पर अंकुश लगा है। वर्ष 2016 की तुलना में अपराधों के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है- मिशन शक्ति केंद्र का असर सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना और निगरानी के बाद 1 अक्टूबर 2025 से 30 जून 2026 के बीच दहेज हत्या के मामलों में 43.32%, पोक्सो एक्ट के मामलों में 17.01%, और घरेलू हिंसा में 13.30% की कमी आई है। यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 2017 के 25 मिनट 42 सेकेंड से घटकर जून 2026 तक 6 मिनट 11 सेकेंड रह गया है। 1.48 लाख से ज्यादा आरोपी दोषी ठहराए गए माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सजा/कन्विक्शन’ के तहत त्वरित पैरवी कर अदालत से सजा दिलाई गई है। कुल 148,441 आरोपियों को सजा सुनाई गई। माफियाओं पर शिकंजा चिह्नित माफिया गिरोहों से जुड़े मामलों में 36 माफियाओं को उम्रकैद और 2 को फांसी की सजा मिली है। इसके अलावा, गैंग्स्टर एक्ट के तहत ₹15,233 करोड़ से ज्यादा की अवैध संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 27.37 लाख से ज्यादा बेटियां लाभान्वित हुई हैं। योजना की सहायता राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी गई है। अब तक 674.13 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत अब तक 5.50 लाख से ज्यादा बेटियों का विवाह कराया गया है। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों, विधवाओं और परित्यक्त महिलाओं की बेटियों का सम्मानजनक विवाह कराना है। निराश्रित महिला पेंशन योजना से 40.34 लाख से ज्यादा महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। सरकार ने मासिक पेंशन को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 1,500 रुपए करने का फैसला किया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत 2.85 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को जागरूक किया गया। प्रदेश में 3.47 लाख से ज्यादा जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। जघन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष के तहत 14,559 पीड़िताओं को 511.20 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षतिपूर्ति जारी की गई। स्वावलंबन और बीसी सखी: जमीनी स्तर पर आर्थिक बदलाव प्रदेश में महिला श्रम बल भागीदारी (LFPR) जो वर्ष 2017 में 13% थी, वह बढ़कर 36% पहुंच गई है। इसके अलावा महिला स्टार्टअप्स की संख्या 2017 के 174 से बढ़कर 2025 में 2,525 हो गई है। 40,000 बीसी सखियों ने ₹44,453 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय लेनदेन संभालकर ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवा आसान की है। 15,409 विद्युत सखियों ने ₹3,207 करोड़ का बिजली बिल संकलन कर ₹41.3 करोड़ का कमीशन प्राप्त किया। 1.82 लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का कुल मानदेय (प्रोत्साहन सहित) बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह तथा सहायिकाओं का ₹4,000 प्रति माह कर दिया गया है। जरूरी आपातकालीन हेल्पलाइंस
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