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‘मेरी मम्मी काफी समय से बहुत परेशान रहती थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि ताई-ताऊजी ने हमारे कमरे पर अपना ताला लगा दिया है। मम्मी को परेशान देखकर हम डीएम साहब के पास गए थे। अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अब हम योगीजी के दरबार में जाएंगे। मैं IAS अफसर बनना चाहता हूं, जिससे अपने जैसे परेशान लोगों की मदद कर सकूं।’ यह कहना है लखीमपुर के 13 साल के छात्र अमिताभ गुप्ता का। 18 जुलाई को समाधान दिवस में डीएम से बेबाक अंदाज में बात करने वाले अमिताभ और उनकी मां से दैनिक भास्कर ने बातचीत की और उनकी परेशानी जानी… पढ़िए सदर कोतवाली के ईदगाह मोहल्ला में रामजानकी मंदिर के पास संकरी गली में एक मकान है। इसी को लेकर झगड़ा चल रहा है। यहां पहुंचने पर पता चला कि अमिताभ के पिता हरीश गुप्ता की मानसिक हालत ठीक नहीं है। वह कभी भी घर से निकलकर कहीं भी जाते हैं। घर का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ा घर की हालात भी ठीक नहीं है। प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ा हुआ है। अमिताभ और उसकी मां संध्या गुप्ता अखबार के लिफाफे बनाकर दुकानों पर बेचते हैं। इसी की कमाई से घर का खर्च चलता है। बहन खुशबू 11वीं में पढ़ती है, लेकिन वह भी लिफाफे बनाने में मां की मदद करती है। हमने पहले अमिताभ से बात की रिपोर्टर: अमिताभ क्या शिकायत लेकर आप डीएम के पास गए थे?
अमिताभ: सर, मेरी मम्मी बहुत परेशान रहती हैं। जब मैंने उनसे पूछा कि क्या बात है, तो उन्होंने बताया कि हमारे घर पर ताऊजी-ताईजी ने कब्जा कर लिया है। वहां अपना ताला लगा दिया है। इसी समस्या को लेकर हम डीएम साहब के पास गए थे। रिपोर्टर: क्या इससे पहले भी कहीं शिकायत की थी?
अमिताभ: जी सर, की थी। पहले हमारी मम्मी ने गई थीं, आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल से शिकायत की थी। तब वह हमारे यहां की डीएम थीं। रिपोर्टर: आपको डीएम के सामने जाने में डर नहीं लगा?
अमिताभ: बिल्कुल भी डर नहीं लगा। जब हम सही काम कर रहे हैं, तो उसमें डरने की कोई बात ही नहीं। लोगों ने मुझसे कहा था कि बेटा अपनी बात रखने में कोई बुराई नहीं है। इसलिए मैं बिना डरे चला गया। रिपोर्टर: क्या आप स्कूल जाते हैं, पढ़ाई करते हैं?
अमिताभ: जी सर, बिल्कुल जाता हूं। मैं कक्षा-8 में पढ़ता हूं। मैं नागरिक शास्त्र ज्यादा पढ़ता हूं। इसके अलावा हिंदी और इंग्लिश भी मेरे पसंदीदा विषय हैं। रिपोर्टर: बड़े होकर आप क्या बनना चाहते हैं?
अमिताभ: सर, मैं IAS ऑफिसर बनना चाहता हूं। रिपोर्टर: आईएएस ही क्यों बनना चाहते हैं?
अमिताभ: सर, मुझे बड़े होकर गरीब और लाचार लोगों की मदद करनी है। हमारे जैसे बहुत से गरीब लोग हैं, जिन्हें सही समय पर मदद नहीं मिल पाती। इसलिए मैं आईएएस बनकर उनकी सेवा करना चाहता हूं। रिपोर्टर: यह सब आपको किसने सिखाया?
अमिताभ: सर, मैं टीवी पर न्यूज देखता हूं। इसके अलावा अपनी नागरिक शास्त्र की किताबों को पढ़ता रहता हूं। इनमें देश और समाज के बारे में बहुत सी बातें बताई गई हैं। वहीं से मैं यह सब सीखता हूं। रिपोर्टर: अब आगे आपका क्या कदम होगा?
अमिताभ: सर, हम एक बार फिर से अधिकारियों से मिलकर कोशिश करेंगे। अगर यहां से हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हम सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के पास (योगी दरबार) जाएंगे। अब पढ़िए मां ने क्या बताया… संध्या गुप्ता ने बताया- मेरे पति हरीश गुप्ता की पहली शादी साल- 2000 में आरती गुप्ता से हुई थी। इस शादी से उनका एक बेटा अनिमेष है। बाद में पति-पत्नी अलग हो गए थे। 2007 में हरीश ने मुझसे दूसरी शादी की थी। संध्या ने बताया- शादी से पहले मुझे यह नहीं बताया गया था कि हरीश की पहले शादी हो चुकी है। उनका एक बेटा भी है। शादी के बाद मुझे इस बात का पता चला। कोर्ट से हरीश गुप्ता ने अपने पहले बेटे अनिमेष को अपने पास ले लिया था। लेकिन, उसका पालन-पोषण मेरी ननद नीलम करती हैं। वह उन्हीं के साथ रहता है। सास ने पूरा घर मेरे नाम कर दिया था संध्या बताती हैं- पुश्तैनी मकान मेरी सास कृष्णा देवी के नाम था। उन्होंने अपने बेटे की मानसिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए यह मकान अपने जीवनकाल में ही मेरे नाम कर दिया था। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के बीच संपत्ति को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। 2 भाइयों को उनका हिस्सा दे दिया संध्या ने बताया- हरीश के 3 भाई कौशल गुप्ता, राजकिशोर और हरिओम हैं। राजकिशोर की कोई संतान नहीं थी। पूरा घर मेरे नाम था, लेकिन मैंने फिर भी कौशल और हरिओम को उनका हिस्सा दे दिया। बाकी हिस्से में मैं बच्चों को लेकर रहने लगी। बीमार पिता की सेवा करने आए बेटा संध्या ने बताया कि झगड़ा तब शुरू हुआ जब जेठ-जेठानी ने घर के एक हिस्से में अपना ताला लगा दिया। उनका कहना था कि यह हिस्सा अनिमेष का है। अनिमेष अपनी बुआ के साथ रहता है। मुझे अनिमेष के अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है। वह परिवार के साथ रहकर अपने बीमार पिता की देखभाल करे। जिम्मेदारियां निभाए, तो मैं उसके हिस्से को लेकर आपत्ति नहीं करूंगी। पहले भी कई बार शिकायत कर चुके हैं संध्या ने बताया कि इस मामले में मैंने कई बार थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और राजस्व विभाग से शिकायत की। लेकिन, अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। आज भी मकान के एक हिस्से पर ताला लगा है। इसी समस्या को लेकर बेटा अमिताभ समाधान दिवस में जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह के सामने शिकायत लेकर पहुंचा था। अब पूरा मामला जानिए… लखीमपुर खीरी में 18 जुलाई (शनिवार) को 13 साल का अमिताभ गुप्ता अकेले ही डीएम के पास पहुंच गया। यह देखकर जनसुनवाई कर रहे डीएम ने उसे पास बुलाया। आने की वजह पूछी, तो वह धड़ल्ले से बोला- मेरे घर पर ताऊ-ताई ने जबरन कब्जा करके ताला लगा दिया है। इसे खुलवा दीजिए। पास में खड़े थानेदार ने कहा- खुलवा देंगे। इस पर बच्चा बोला- खुलवा देंगे नहीं…खुलवा दीजिए। बार-बार न आना पड़े। इसी बीच पुलिसवाले हंसने लगे, तो बच्चा उखड़ गया। उसने कहा- आप लोगों को क्या है, कमीशन मिल जाए, तो ताबड़तोड़ काम कर देते हैं। डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कोतवाल राजेश कुमार से कहा- बच्चे के घर जाकर ताला खुलवाइए। कोतवाल राजेश कुमार सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे। पूछताछ में पता चला कि बच्चा जिस घर के कमरे का ताला खुलवाने की बात कर रहा है, वह उसके पिता की पहली पत्नी का है। पहली पत्नी की मौत हो चुकी है। उनका बेटा लखनऊ में रहता है। तब से बच्चे के ताऊ ने कमरे पर ताला लगा दिया है। इसके बाद कोतवाल बिना ताला खुलवाए लौट आए। ————————- यह खबर भी पढ़ें… त्रिपुरा DGP ऑफिस में मृत मिले, सुसाइड की आशंका, 1994 बैच के IPS, UP के रहने वाले थे; 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच की थी यूपी के रहने वाले त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ का शव मिला है। सोमवार सुबह वह पुलिस मुख्यालय में अचेत मिले। अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, अनुराग धनखड़ ने सुसाइड किया है। उनका शव फिलहाल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है। पढ़ें पूरी खबर…



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