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बुलंदशहर में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी राजनीतिक दल संभावित प्रत्याशियों और सीटों पर मंथन में जुटे हैं। बुलंदशहर की डिबाई विधानसभा सीट पर इस बार सबसे दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यहां पूर्व बाहुबली विधायक गुड्डू पंडित और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र के बीच सीधा मुकाबला हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो 2007 के विधानसभा चुनाव जैसा सियासी मुकाबला एक बार फिर देखने को मिल सकता है। डिबाई विधानसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का पारंपरिक राजनीतिक गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर लोध मतदाताओं की अच्छी संख्या है। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में गुड्डू पंडित ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया को हराया था। इसके बाद 2012 में उन्होंने सपा के टिकट पर फिर राजू भैया को मात देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। दल बदलते रहे, लेकिन डिबाई पर बनी रही नजर 2016 में गुड्डू पंडित ने विधान परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर सपा से बगावत कर दी थी। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने बुलंदशहर सदर सीट से रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। लोकसभा में बसपा से लड़े, अब फिर वापसी की चर्चा 2019 के लोकसभा चुनाव में गुड्डू पंडित ने दोबारा बसपा का दामन थामा और फतेहपुर सीकरी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने फिर सपा का रुख किया। अब राजनीतिक चर्चाओं में माना जा रहा है कि वह 2027 में एक बार फिर बसपा के टिकट पर डिबाई विधानसभा सीट से ताल ठोक सकते हैं। इसे देखते हुए उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता भी बढ़ा दी है। भाजपा कल्याण सिंह परिवार की विरासत पर लगाएगी दांव भाजपा भी डिबाई सीट पर कल्याण सिंह परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। पूर्व मुख्यमंत्री के बड़े पौत्र संदीप सिंह प्रदेश सरकार में मंत्री हैं, जबकि अब छोटे पौत्र को डिबाई विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की चर्चा तेज है। यदि पार्टी उन्हें टिकट देती है तो डिबाई में मुकाबला बेहद रोचक और प्रतिष्ठा का बन सकता है। टिकट की घोषणा के बाद होगी तस्वीर साफ हालांकि अभी किसी भी दल ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में यह पूरा सियासी परिदृश्य संभावनाओं और चर्चाओं पर आधारित है। टिकट वितरण के बाद ही डिबाई विधानसभा सीट पर मुकाबले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
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