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उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने जिला पंचायत की लगभग 20 करोड़ रुपये की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। यह कार्रवाई अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) धर्मेंद्र कुमार के 72 घंटे बाद भी पत्रावलियों के साथ डीएम के समक्ष पेश न होने के बाद की गई। जिलाधिकारी ने एएमए का वेतन भी अगले आदेशों तक रोक दिया है। यह मामला शासनादेश और जिलाधिकारी को बाईपास करने से जुड़ा है। पंचायती राज विभाग के 10 जुलाई 2026 के शासनादेश के अनुसार, जिला पंचायत में प्रशासकीय व्यवस्था लागू है। इसके तहत प्रशासक केवल सामान्य कार्य ही कर सकते हैं। कोई भी नीतिगत या बड़ा वित्तीय प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से ही शासन को भेजा जाना अनिवार्य है। 20 करोड़ रुपये की ई-निविदाएं इसके विपरीत, जिला पंचायत ने पंचम राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 3 अगस्त को लगभग 20 करोड़ रुपये की ई-निविदाएं जारी कर दी थीं। इन निविदाओं को 24 अगस्त को खोला जाना था। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारी को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। मामला संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने 19 अगस्त को एएमए धर्मेंद्र कुमार को सभी अभिलेखों और लिखित स्पष्टीकरण के साथ व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी एएमए उपस्थित नहीं हुए। 25 करोड़ रुपये की ई-टेंडरिंग गौरतलब है कि एएमए धर्मेंद्र कुमार पहले भी विवादों में रहे हैं। तीन जिला स्तरीय अधिकारियों की जांच में उन्हें 25 करोड़ रुपये की ई-टेंडरिंग धांधली में दोषी पाया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को डीओ लेटर भेजा जा चुका है। अब इस नए मामले में वेतन रोके जाने और टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगने से विभाग में हड़कंप मच गया है।
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