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चंदौली के चतुर्भुजपुर कस्बे में सैकड़ों वर्ष पुराना स्वयंभू कालेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर के दर्शन मात्र से अकाल मृत्यु टल जाने की मान्यता है। गुरुवार से सावन माह शुरू हो रहा है, जिसके चलते मंदिर में भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग सहित अन्य तैयारियां की हैं। मंदिर के निर्माण का इतिहास लगभग 1800 ईस्वी का है। बताया जाता है कि बनारस स्टेट के सेनापति बाबू बखत सिंह को एक दिन स्वप्न में स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन हुए थे। इसके बाद उन्होंने चतुर्भुजपुर के बरठी गांव के समीप खुदाई शुरू कराई, जहां भगवान भोलेनाथ का स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ। सेनापति बाबू बखत सिंह ने ही इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया था। मंदिर से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण घटना ब्रिटिश काल की है। ब्रिटिश अधिकारी रॉबिन विक्टर एग्जलेंडर स्टॉक, जो असिस्टेंट सुपरीटेंडेंट और रेल पथ इंजीनियर थे, मंदिर की दहलीज को छोटा कर प्लेटफॉर्म का विस्तार करना चाहते थे। लोगों का मानना है कि कालेश्वर महादेव के प्रकोप के कारण 4 अगस्त 1928 को अधिकारी की विशेष सैलून मंदिर से कुछ दूरी पर पलट गई, जिससे उनकी मौत हो गई। अधिकारी की पत्नी ने पति की याद में शिलापट लगाकर प्लेटफॉर्म विस्तार का कार्य रुकवा दिया था और वापस लौट गईं। सावन माह में यहां जिले सहित आसपास के जिलों और बिहार प्रांत से बड़ी संख्या में भक्त दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिर के प्रशासनिक अधिकारी पीयूष तिवारी ने बताया कि स्वयंभू कालेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन मात्र से सभी दुखों का नाश हो जाता ह
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