Sorting by

×


  • Hindi News
  • National
  • Gujarat HC Dismisses Kejriwal Appeal In PM Modi Degree Case | Fine Upheld

अहमदाबाद4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने केजरीवाल पर लगे 25 हजार रुपए के जुर्माने को भी बरकरार रखा। इस मामले में कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीए रे की बेंच ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 2016 के निर्देश को रद्द करने और केजरीवाल पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाने वाले फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

हाईकोर्ट की सिंगल जज की बेंच ने 31 मार्च 2023 को अरविंद केजरीवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था और आरटीआई के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल को लेकर फटकार लगाते हुए कहा था कि उनका रवैया कैजुअल था। सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ केजरीवाल को हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका दायर की थी।

अब पूरा मामला समझिए…

साल 2016 में केजरीवाल ने सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (सीआईसी) को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक की जानी चाहिए। अप्रैल 2016 में सीआईसी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि पीएम मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं।

सीआईसी के फैसले के खिलाफ यूनिवर्सिटी हाईकोर्ट पहुंच गई थी। तीन महीने बाद हाई कोर्ट ने सीआईसी के आदेश को तब रद्द कर दिया था।

मई 2016 में गुजरात यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वाइस चांसलर एमएन पटेल ने घोषणा की थी कि पीएम मोदी ने पॉलिटिकल साइंस में 1983 में MA किया और उन्हें एक्सटर्नल स्टूडेंट के तौर पर 62.3 फीसदी अंक मिले थे। अपनी वेबसाइट पर डिग्री डालने के साथ-साथ गुजरात यूनिवर्सिटी ने सीआईसी के आदेश को भी चुनौती दी थी। सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 के सीआईसी के निर्देश को रद्द कर दिया था। साथ ही उन पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था।

केजरीवाल के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही थी।

केजरीवाल के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही थी।

मनु सिंघवी ने कहा- केजरीवाल ने पीएम मोदी की डिग्री पाने के लिए जोर नहीं दिया था

अपनी अपील की सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने पीएम मोदी की डिग्री पाने के लिए लगातार जोर नहीं दिया था, जैसा कि सिंगल बेंच ने माना था।

उन्होंने तर्क दिया था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और उन्हें किसी औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर प्रतिवादी बनाया था। सिंघवी ने तर्क दिया कि अगर डिग्री सच में ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे शायद गुजरात यूनिवर्सिटी ने इसके सार्वजनिक महत्व को देखते हुए उपलब्ध कराया है तो यह आरटीआई एक्ट के दायरे में आनी चाहिए और कार्रवाई की वजह खत्म हो जाएगी।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- केजरीवाल ने संस्थान को बदनाम किया यूनिवर्सिटी की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि केजरीवाल ने लगातार यह केस लड़ा और संस्थान को बदनाम करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कीं।

उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को केजरीवाल पर अपील करने के लिए जुर्माना लगाना चाहिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि आरटीआई एक्ट का गलत इस्तेमाल न हो और सरकारी अधिकारियों का काम का कीमती समय ऐसी रिक्वेस्ट से निपटने में बर्बाद न हो जिनसे एक्ट का मकसद पूरा नहीं होता।

अप्रैल 2023 में, गुजरात यूनिवर्सिटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर अरविंद केजरीवाल के बयानों को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

अप्रैल 2023 में, गुजरात यूनिवर्सिटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर अरविंद केजरीवाल के बयानों को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

केजरीवाल ने की थी डिग्री सार्वजनिक करने की मांग

2016 में केजरीवाल ने सीआईसी को पत्र लिखकर मांग की थी कि प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक की जाए। अप्रैल 2016 में तत्कालीन सीआईसी एम. श्रीधर आचार्युलु ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि वे पीएम मोदी को मिली डिग्रियों के बारे में केजरीवाल को जानकारी दें।

पत्र के आधार पर सीआईसी ने यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता के रिकॉर्ड केजरीवाल को देने का निर्देश दिया। यूनिवर्सिटी ने सीआईसी के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि किसी की गैर-जिम्मेदाराना जिज्ञासा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जनहित नहीं हो सकती।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *