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शाहजहांपुर में बंडा नगर पंचायत के चेयरमैन मोहम्मद इसहाक ने बंडा थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चेयरमैन का कहना है कि थाना प्रभारी की मौजूदगी में उनकी हत्या कराई जा सकती है। इस संबंध में एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें थाना प्रभारी चेयरमैन से सख्त लहजे में बात करते सुनाई दे रहे हैं। ये आडियो सोमवार रात करीब 11 बजे सामने आया है। यह मामला 25 जून का है। चेयरमैन इसहाक के अनुसार, एक सभासद ने बंडा कार्यालय गेट पर उन्हें गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। यह घटना सफाईकर्मियों के सामने हुई।चेयरमैन ने इस संबंध में थाने में तहरीर दी, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
चेयरमैन ने बताया कि जब उन्होंने इस घटना के संबंध में बंडा थाना प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह से फोन पर बात की, तो इंस्पेक्टर ने उनसे कहा,”हमें तरीका न समझाएं, हमें अच्छे से तरीका आता है।” चेयरमैन का आरोप है कि इंस्पेक्टर ने उनसे यह भी कहा कि उन्हें कानून न सिखाया जाए। मोहम्मद इसहाक ने आशंका जताई है कि जब तक ये थाना प्रभारी रहेंगे,उनकी कभी भी हत्या हो सकती है। उन्होंने दावा किया है कि मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। चेयरमैन ने इंस्पेक्टर की शिकायत करने की भी बात कही है। चेयरमैन का एक और आरोप है कि जिस व्यक्ति ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी है, पुलिस उसी के सामने उन्हें थाने के अंदर बुलाकर बात करने के लिए कह रही है। चैयरमेन ने कहा कि वह इस मामले में वित्त मंत्री और आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे। चैयरमेन ने कहा कि वह निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा सरकार ने उनके बंडा को कस्बा बनाया और विकास कार्य कराए। उनका दावा है कि जब तक वह बंडा में रहेंगे, उनकी हत्या हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस मित्र होने के बावजूद उनके साथ ऐसा सलूक किया गया। दूसरी ओर,बंडा थाना प्रभारी बृजेश सिंह ने चैयरमेन के आरोपों को निराधार बताया है।उन्होंने कहा कि चैयरमेन ने एक सभासद पर आरोप लगाया था।पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया था,लेकिन चैयरमेन थाने नहीं आए। थाना प्रभारी ने अभद्रता के आरोपों को भी खारिज किया। इस मामले से जुड़ा एक ऑडियो भी सामने आया है। इसमें चैयरमेन और इंस्पेक्टर के बीच बातचीत रिकॉर्ड है। चैयरमेन ने इंस्पेक्टर से एक मामले में की गई कार्रवाई पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने एक प्रार्थना पत्र दिया था। एसआई ने गवाहों के बयान लिए गए थे और वीडियो भी बनाई थी।

चैयरमेन ने पूछा कि जब कोई उनके खिलाफ प्रार्थना पत्र देता है तो पहले एफआईआर दर्ज की जाती है और फिर जांच होती है। इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि जांच में सही पाए जाने पर ही कार्रवाई होती है। उन्होंने चैयरमेन को पुलिस प्रक्रिया न सिखाने की बात कहते हुए कहा कि उन्हें तरीका अच्छे से मालूम है।



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