नई दिल्ली1 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के धर्मस्थला में 17 साल की छात्रा के रेप-मर्डर केस की दोबारा जांच का आदेश दिया। मामला 2012 का है।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कर्नाटक सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने और तीन महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले जिस तरह जांच हुई उसने कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया है।

मां की याचिका पर आया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़ित छात्रा की मां की याचिका पर दिया। 17 साल की छात्रा 9 अक्टूबर 2012 को कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थी।
वह धर्मस्थला के पास उजिरे में पढ़ती थी। अगले दिन उसका शव मिला। जांच में यौन हमले और हत्या के सबूत मिले थे।
इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी। इसके बाद कर्नाटक CID और फिर CBI ने जांच की।
CBI की स्पेशल कोर्ट ने जून 2023 में मामले में आरोपी बनाए गए एकमात्र व्यक्ति संतोष राव को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया था।
SIT में पुराने जांच अधिकारियों को जगह नहीं
- कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक सरकार आधुनिक जांच तकनीक के इस्तेमाल में माहिर और अफसरों की SIT बनाए। टीम का नेतृत्व राज्य का कोई सीनियर पुलिस अफसर करे।
- बेलथंगडी पुलिस स्टेशन, कर्नाटक CID या CBI की पुरानी जांच टीमों का हिस्सा रहे किसी अधिकारी को SIT में शामिल नहीं किया जाएगा।
- बेंच ने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, उसे अपराध करने में अक्षम माना गया। इससे साफ है कि जांच ऐसे तरीके से हुई, जिससे पीड़ित नाबालिग के साथ अन्याय हुआ।
पीड़ित को न्याय दिलाना समाज का कर्तव्य
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से आरोपी बनाए गए व्यक्ति के साथ हुए अन्याय की भरपाई की जा सकती है। लेकिन बेरहमी से रेप और मर्डर की शिकार नाबालिग के साथ हुआ अन्याय कभी पूरा नहीं किया जा सकता।
अगर समाज ऐसे जघन्य अपराध में सही जांच और असली अपराधियों को सजा दिलाकर न्याय नहीं देता, तो वह अपना कर्तव्य निभाने में असफल होगा।
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