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बरेली के सैटेलाइट बस स्टैंड पर ठेले के नीचे लावारिस हालत में मिला 3 महीने का मासूम आखिरकार अपने मां-बाप की गोद में लौट गया। दो दिन पहले जिस बच्चे को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई थीं और लोग उसके मां-बाप को कोस रहे थे, वही मां-बाप अब उसे लेने हरदोई से बरेली पहुंचे। उनका कहना है कि गरीबी और बच्चे की बीमारी ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था। मीडिया में खबरें देखने के बाद उनका दिल नहीं माना और वे अपने कलेजे के टुकड़े को वापस लेने चले आए। गरीबी और बीमारी ने लिया गलत फैसला
मामला बारादरी थाना क्षेत्र के सैटेलाइट बस स्टैंड का है। हरदोई निवासी स्वाति पत्नी सचिन अपने 3 महीने के बेटे को बस स्टैंड पर एक ठेले के नीचे छोड़कर चले गए थे। मासूम लगातार रोता रहा। उसकी आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने ठेले के नीचे देखा तो बच्चा अकेला पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद बच्चे को चाइल्ड हेल्पलाइन की निगरानी में रखा गया। मीडिया में खबर देखकर बदल गया फैसला
घटना की खबर मीडिया में प्रकाशित हुई। खबर देखने के बाद बच्चे के मां-बाप का मन बदल गया। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और हरदोई से सीधे बरेली पहुंच गए। आवश्यक दस्तावेज और पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने अपने बेटे को वापस लेने की इच्छा जताई। जब लोग दे रहे थे बद्दुआ, तब कोई नहीं जानता था सच्चाई
जिस समय मासूम ठेले के नीचे मिला था, वहां मौजूद लोग उसके मां-बाप को कोस रहे थे। हर किसी के मन में यही सवाल था कि आखिर कौन ऐसे मां-बाप होंगे जो अपने पांच महीने के मासूम को इस तरह बेसहारा छोड़ सकते हैं। लोगों का कहना था कि अगर बच्चे तक कोई आवारा कुत्ता या बंदर पहुंच जाता तो उसकी जान भी जा सकती थी। गनीमत रही कि समय रहते लोगों ने उसके रोने की आवाज सुन ली और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कागजी प्रक्रिया के बाद सौंपा गया बच्चा
बच्चे के मिलने के बाद उसे चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में रखा गया था। सोमवार को हरदोई से पहुंचे उसके मां-बाप से पूछताछ की गई। उनकी पहचान और पारिवारिक दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद नियमानुसार लिखापढ़ी पूरी की गई। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन ने बच्चे को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि हरदोई निवासी दंपती अपने 3 महीने के बेटे को लेने बरेली आए थे। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि आर्थिक तंगी और बच्चे की बीमारी के कारण उन्होंने उसे बस स्टैंड पर छोड़ दिया था। मीडिया में खबरें देखने के बाद वे दोबारा बरेली पहुंचे और बच्चे को वापस ले जाने की इच्छा जताई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया गया।
दंपती को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि इस तरह की लापरवाही दोबारा की गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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