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“निश्चित तौर पर यह बहुत ही पीड़ादायक मंजर है। मैं यहां देख रहा हूं कि हजारों की संख्या में माताओं-बहनों और छोटे-छोटे मासूम बच्चों की चप्पलों के ढेर लगे हुए हैं। लेकिन मेरा सवाल यह है कि आखिर इस जर्मन हैंगर, इतने बड़े होर्डिंग्स और भव्य आयोजन का पैसा आता कहां से है? कौन इसे फंड करता है? किसी भी निजी व्यक्ति में इतनी सामर्थ्य और ताकत नहीं है कि वह इतना बड़ा आयोजन करे, इतने बड़े टेंट लगवाए और हजारों लोगों को मिठाई, साड़ी व उपहार बांटे। दरअसल यह सुनियोजित लूट है और भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में इसी तरह लूट कर रही है।” यह तीखा हमला कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. के. बी. त्रिपाठी (गुरु जी) ने बरेली मेयर डॉ. उमेश गौतम के रक्षाबंधन कार्यक्रम में मची भगदड़ और महिला की मौत के बाद बोला। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है। निगम में 12% एडवांस कमीशन और स्मार्ट सिटी के बजट की बर्बादी
डॉ. त्रिपाठी ने नगर निगम के कामकाज पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निगम में ठेका लेने जाने वाले ठेकेदारों से पहले 12% कमीशन लिया जाता है, तब उन्हें टेंडर डालने की अनुमति मिलती है। उसके बाद अन्य कमीशन तय होते हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने डॉ. उमेश गौतम को मेयर चुना, लेकिन क्या इसीलिए चुना था कि स्मार्ट सिटी की तमाम योजनाएं धूल फांकती रहें? आज शहर में लगाने के नाम पर बजट खर्च हो रहा है और फिर उखाड़ने के नाम पर बजट बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया और सिविल सोसाइटी से अपील की कि वे इस बात की पड़ताल करें कि आखिर इतने बड़े कार्यक्रमों के लिए यह पैसा कहां से आ रहा है, क्योंकि केंद्र, प्रदेश, जिला पंचायत और नगर निगम में बैठी भाजपा की ‘फोर इंजन’ सरकार खुद तो इसकी कोई जांच कराएगी नहीं। 20 हजार की भीड़ जुटी, महिला की जान गई फिर भी अफसर बेखबर
कांग्रेस प्रवक्ता ने जिला प्रशासन की भूमिका पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि एक मां की जान चली गई और दो मासूम बच्चों के भी दबकर मरने की चर्चा है। इसके बावजूद प्रशासन का रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि डीएम का यह कहना कि उन्हें कोई खबर नहीं है, बेहद आपत्तिजनक है। एसएसपी, एसपी सिटी और सिटी मजिस्ट्रेट तक कह रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं थी। त्रिपाठी ने सवाल किया कि क्या अफसरों की नाक के नीचे बिना अनुमति के 20 हजार लोग जुट जाते हैं, भगदड़ मच जाती है, मौतें हो जाती हैं और साहब बेखबर रहते हैं? क्या बरेली क्लब और मेला ग्राउंड प्रबंधन ने भी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया? जब विपक्ष सवाल उठाता है तो कहा जाता है कि लाशों पर राजनीति हो रही है। बिना पोस्टमॉर्टम शव मैनेज करने का आरोप, FIR की मांग
डॉ. त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में मामले को रफा-दफा करने का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि मंडल अध्यक्ष स्तर के लोग मामले को मैनेज करने में जुटे रहे, जिसके चलते मृतका का पोस्टमॉर्टम तक नहीं कराया गया और न ही अभी तक कोई एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लाशों पर खेलने वाले लोग याद रखें कि ‘समय की लाठी’ बहुत चुपचाप और बेहद खतरनाक तरीके से चलती है। विपक्ष पर पहरा, सत्ता पक्ष को नियमों की अनदेखी की छूट
प्रशासन के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए त्रिपाठी ने कहा कि विपक्ष को तो कोई छोटी बैठक या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की भी अनुमति नहीं मिलती और सिटी मजिस्ट्रेट तुरंत पहुंच जाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों को जांच के नाम पर महीनों सील रखा गया और परेशान किया गया, लेकिन यहां इतनी बड़ी त्रासदी और महिला की मौत के बाद भी अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं। उन्होंने कहा कि पहले अपनी नीतियों से जनता को गरीब बनाया जाता है और फिर फ्री का प्रलोभन देकर उनकी जान जोखिम में डाल दी जाती है। इस पूरे घटनाक्रम और मैदान में बिखरी हजारों चप्पलों की सीधी जिम्मेदारी बरेली प्रशासन और मेयर की है।



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