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हृदय रोगों से बचाव की चर्चा में अक्सर हम खान-पान, एक्सरसाइज और बीपी-शुगर पर ध्यान देते हैं, लेकिन खराब नींद को एक गंभीर कारण के तौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। कानपुर स्थित के-केयर हॉस्पिटल में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार और उनकी टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि खराब और कम नींद दिल के दौरे (हार्ट अटैक) का एक प्रमुख कारण बन रही है। स्टडी के अनुसार, अस्पताल में आए 55 प्रतिशत हार्ट अटैक मरीज अटैक पड़ने से पहले के महीनों में रोजाना औसतन सात घंटे से कम सो पा रहे थे। यह आंकड़े नींद की कमी को दिल की बीमारियों के एक बड़े रिस्क फैक्टर के रूप में स्थापित करते हैं। 36% मरीज केवल 4 से 6 घंटे सो रहे थे शोधकर्ताओं ने मरीजों से उनकी नींद के पैटर्न और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों पर सवाल पूछे। इसमें पाया गया कि 36 प्रतिशत मरीज रोजाना महज 4 से 6 घंटे ही सोते थे, जबकि 9 प्रतिशत मरीज 4 घंटे से भी कम की नींद ले रहे थे। केवल 45 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जो अनुशंसित 7 से 9 घंटे की नींद पूरी कर पा रहे थे। हार्ट अटैक आने से ठीक एक हफ्ते पहले यह स्थिति और बिगड़ गई। लगभग 45 प्रतिशत मरीजों ने बताया कि कार्यक्षेत्र के दबाव, मानसिक तनाव या किसी बीमारी के चलते पिछले सप्ताह में उनकी नींद सामान्य से काफी कम हो गई थी। 55% में मिले खर्राटों के लक्षण, स्लीप एपनिया की ओर इशारा स्टडी में शामिल 36 प्रतिशत मरीजों ने अपनी नींद की गुणवत्ता को ‘काफी खराब’ या ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि 55 प्रतिशत मरीज आदतन खर्राटे लेते थे, जो स्लीप एपनिया का स्पष्ट संकेत है। हालांकि, अस्पताल आने से पहले इनमें से किसी भी मरीज का स्लीप एपनिया के लिए औपचारिक परीक्षण नहीं हुआ था। इसके अलावा, मरीजों में अन्य पारंपरिक रिस्क फैक्टर भी उच्च स्तर पर पाए गए। इनमें 100 प्रतिशत मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर, 82 प्रतिशत में पारिवारिक हृदय रोग का इतिहास, 64 प्रतिशत में डायबिटीज और 55 प्रतिशत में सुस्त जीवनशैली दर्ज की गई। रक्तचाप और तनाव हार्मोन बढ़ाती है कम नींद
अध्ययन के मुख्य अन्वेषक डॉ. अमित कुमार ने बताया कि कम नींद से रक्तचाप बढ़ता है, शरीर में सूजन की समस्या होती है और तनाव हार्मोन में इजाफा होता है, जिससे सीधे तौर पर हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। खराब नींद और अनडायग्नोज्ड स्लीप एपनिया सीधे तौर पर बीपी और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जुड़े पाए गए हैं। डॉ. अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि,हालांकि अभी मरीजों का सैम्पल साइज छोटा है और यह अध्ययन आगे भी जारी रहेगा, लेकिन ये शुरुआती निष्कर्ष यह संदेश देते हैं कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए नींद को भी खान-पान और एक्सरसाइज जितनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
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