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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने विद्यालयों की मान्यता और संबद्धता शुल्क पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अनिवार्य कर दिया है। यह नियम मान्यता प्राप्त, संबद्ध विद्यालयों के साथ-साथ नई मान्यता के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं पर भी लागू होगा। बिना जीएसटी भुगतान के किसी भी आवेदन पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के 11 अक्टूबर 2024 के परिपत्र और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम-2017 के प्रावधानों के तहत शिक्षण संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पोर्टल पर नवीन मान्यता या संबद्धता के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं को निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना अनिवार्य होगा। जीएसटी जमा होने की पुष्टि के बाद ही मान्यता प्रदान करने की संस्तुति की जाएगी। भविष्य के सभी नए आवेदनों के लिए भी जीएसटी भुगतान आवश्यक होगा; बिना इसके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। मान्यता शुल्क राजकोष में जमा करने के बाद, जीएसटी की राशि परिषद के निर्धारित बैंक खाते में अलग से जमा करनी होगी। जीएसटी जमा करने की रसीद या चालान की प्रमाणित प्रति ऑनलाइन आवेदन के समय पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसकी एक प्रति संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में भी उपलब्ध करानी होगी। परिषद ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और नवीन मान्यता के इच्छुक संस्थानों को इस नई व्यवस्था से अवगत कराएं। उन्हें नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। परिषद ने पुनः स्पष्ट किया है कि जीएसटी भुगतान की पुष्टि के बिना मान्यता प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
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