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प्रयागराज के हनुमानगंज में गुरुवार सुबह किराए के कमरे में 26 वर्षीय ऊषा की गला रेतकर हत्या के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक, हत्या करने वाला कोई बाहरी नहीं, बल्कि मृतका के पति दीपक का दूर का रिश्तेदार 35 वर्षीय आशीष निकला। उसने एक दिन पहले ऊषा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। उसके इनकार करने और गाली देकर घर से निकालने से वह रातभर सो नहीं सका। सुबह बाजार से 30 रुपये का चाकू खरीदा और ऊषा के घर पहुंचकर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशीष ने पुलिस पूछताछ में पूरी वारदात बयां की। उसके बयान के मुताबिक, मैं बुधवार शाम ऊषा के घर गया था। मैंने उससे कहा कि तुम मुझसे शादी कर लो। वह यह सुनकर भड़क गई। उसने मुझे गालियां दीं और घर से निकाल दिया। मैं वहां से चला आया, लेकिन रातभर सो नहीं सका। मुझे उसकी कही बातें याद आती रहीं। 2 तस्वीरें देखिए… सुबह चाकू खरीदकर पहुंचा ऊषा के घर
पुलिस के मुताबिक, आशीष को मालूम था कि ऊषा का पति दीपक घर पर नहीं है। इसी का फायदा उठाकर वह गुरुवार सुबह करीब 9:15 बजे उसके घर पहुंचा। घर पहुंचने से पहले उसने हनुमानगंज बाजार से 30 रुपये का चाकू खरीदा था।
उसने पुलिस को बताया, सुबह मैंने चाकू खरीद लिया और सीधे ऊषा के घर पहुंच गया। मुझे पता था कि दीपक घर पर नहीं है।
उस वक्त ऊषा कमरे में अपनी चार साल की बेटी स्वीटी के साथ थी। ऊषा मैगी बना रही थी और मासूम बच्ची वहीं खेल रही थी।
पीछे से दबोचा, पहले शरीर पर किए वार फिर गला रेत दिया
पूछताछ में आशीष ने बताया, मैं कमरे के अंदर पहुंचा और पीछे से ऊषा को पकड़ लिया। उसने खुद को छुड़ाने की कोशिश की। मैंने चाकू निकालकर उसके शरीर पर कई वार किए। इसके बाद उसका गला रेत दिया।
पुलिस के मुताबिक, ऊषा लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ी। इसी दौरान उसकी चार साल की बेटी स्वीटी चीखने लगी।
आशीष ने बताया, बेटी चीखने लगी तो मैंने उसे डांटकर चुप करा दिया। इसके बाद मैं वहां से भाग गया। चाकू भी वहीं छोड़ दिया। एक दिन पहले तक ऊषा को पाने की उम्मीद थी
पुलिस की पूछताछ में आशीष पेंटर का काम करता है। उसकी पत्नी भी कई साल पहले उसे छोड़कर चली गई थी। इसके बाद वह अकेला रह रहा था।
11 अगस्त को दीपक अपनी पत्नी ऊषा और चार साल की बेटी के साथ प्रयागराज आया था। दीपक को किराए का कमरा दिलाने में आशीष की भूमिका थी। दरअसल दीपक के बहनोई ने आशीष से कमरे की बात की थी। आशीष ने ही हनुमानगंज के कोटवां रोड स्थित जैतपुर गांव में सराफा कारोबारी अनिल स्वर्णकार के मकान की दूसरी मंजिल पर कमरा दिलवाया था।
मकान के नीचे अनिल की सराफा दुकान है। इसी दुकान पर लगे सीसीटीवी कैमरे ने बाद में हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस की मदद की।
पहली मुलाकात में ही ऊषा पर फिदा हो गया
आशीष ने पुलिस को बताया, जब दीपक अपने परिवार के साथ प्रयागराज आया तो मैंने पहली बार ऊषा को देखा था। उसे देखते ही मैं उसे पसंद करने लगा था। इसके बाद मैं उसके करीब जाने की कोशिश करने लगा।
पुलिस के मुताबिक, दीपक मजदूरी का काम करता था। जब वह काम पर चला जाता तो आशीष किसी न किसी बहाने से ऊषा के कमरे पर पहुंच जाता था। शुरुआती दिनों में दंपती के पास गैस सिलेंडर भी नहीं था। ऐसे में आशीष ने दो दिन पहले तक उनके खाने का इंतजाम भी किया था। एक दिन पहले ही उसने घर में गैस सिलेंडर पहुंचाया।
आशीष को उम्मीद थी कि ऊषा उसके साथ जाने के लिए तैयार हो जाएगी।
उसने पुलिस को बताया, मुझे लगा था कि ऊषा मुझे पसंद करने लगेगी। मैं उसे अपने साथ कहीं ले जाना चाहता था। मैं उसकी बेटी को भी साथ रखने को तैयार था लेकिन वह नहीं मानी। बुधवार को आखिरी बार शादी की बात कही
पुलिस के अनुसार, बुधवार शाम आशीष इसी इरादे से ऊषा के कमरे पर गया था। उसे पता था कि दीपक दोपहर में ही अपने गांव चला गया है और अगले दिन लौटने वाला है। घर में ऊषा अकेली थी।
आशीष ने उससे शादी करने की बात कही, लेकिन ऊषा ने साफ इनकार कर दिया। दोनों के बीच विवाद हुआ और ऊषा ने उसे गालियां देकर घर से निकाल दिया।
इसके बाद आशीष घर लौट गया, लेकिन उसके मन में गुस्सा बढ़ता गया। रातभर वह सो नहीं सका। सुबह उसने चाकू खरीदा और वारदात को अंजाम देने पहुंच गया।
सीसीटीवी में दिखा था घर में जाता हुआ
हत्या के बाद पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। मकान के नीचे स्थित सराफा दुकान के कैमरे में आशीष सुबह करीब नौ बजे घर की ओर जाता दिखाई दिया। कुछ देर बाद वह वहां से निकलता भी नजर आया।
पुलिस को इसी फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिला। फुटेज में दिखाई दे रहे युवक की तस्वीर मृतका के पति दीपक को दिखाई गई तो उसने उसकी पहचान आशीष के रूप में की।
इसके बाद पुलिस टीम ने आशीष की तलाश शुरू की और उसे सरायइनायत इलाके से ही हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। घर में अकेली थी ऊषा, बच्ची की चीख से पड़ोसी पहुंचे
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे ऊषा की बेटी स्वीटी के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी ऊपर पहुंचे। कमरे में ऊषा खून से लथपथ पड़ी थी। इसके बाद लोगों को वारदात की जानकारी हुई थी।
कमरे के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था आशीष
पुलिस की जांच में सामने आया कि आशीष के लिए ऊषा तक पहुंचना बहुत आसान था। वह न केवल परिवार को जानता था, बल्कि दीपक को कमरा दिलाने में भी उसकी भूमिका थी। यही वजह थी कि उसका घर पर आना-जाना परिवार के लिए असामान्य नहीं था।
लेकिन पुलिस के मुताबिक, बुधवार की बेइज्जती के बाद उसके मन में हत्या का ख्याल आया और अगले दिन उसने इसे अंजाम दे दिया। मायकेवालों का फिलहाल पता नहीं
उधर ऊषा के मायकेवालों का अब तक पता नहीं चल सका है। पुलिस को पूछताछ में पति दीपक ने बताया कि वह उतरांव का रहने वाला है और कई साल से मुंबई में रहकर ऑटो चलाता था। वहीं उसकी मुलाकात ऊषा से हुई जो एक दुकान में टेंट हाउस के पर्दे सिलने का काम करती थी। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और इसके बाद उन्होंने शादी कर ली। उसने बताया कि ऊषा जौनपुर की रहने वाली थी लेकिन इससे ज्यादा उसके परिवार के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं।
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