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‘गंगा का जलस्तर लगातार वाराणसी में बढ़ रहा है। ऐसे में कुछ ही घंटों बाद सीढ़ियों पर शवदाह मुश्किल हो जाएगा और गलियों में शवदाह होगा। पर गलियों में गंदगी का अंबार है तो लोग खुले में मलमूत्र कर रहे हैं। ऐसे में कैसे यहां शवदाह होगा; जबकि नगर निगम को यहां की अब तक सफाई करवा देनी चाहिए थी। यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो शवदाह में दिक्कतें होगीं।’ ये कहना है वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट के डोमराज परिवार के बहादुर चौधरी का; बहादुर ने बताया- नगर निगम हर वर्ष सफाई करवाता है लेकिन इस बार कोई सुनवाई नहीं हो रही। लोग आराम से खुले में मलमूत्र कर रहे हैं। यहां अब चिता सजने लगी है लेकिन सफाई नहीं हुई है। वाराणसी में मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर दिन के सभी पहरों में शवदाह होता है। ये दोनों शमशानों पर सदियों से चिता की आग ठंडी नहीं हुई है। लेकिन बाढ़ के पानी के बढ़ने से अब शवदाह पर विराम लगने की समस्या उत्पन्न होने लगी। यहां पानी बढ़ने से अब सीढ़ियों पर शवदाह हो रहा है। जो कुछ घंटों बाद गलियों में होना शुरू जाएगा। ऐसे में दैनिक भास्कर ने डोमराज परिवार के सदस्यों से नगर निगम से नाराजगी की वजह जानी और समस्याओं को जाना। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिये तीन तस्वीरें… गलियों में गंदगी कहां करें दाह संस्कार डोमराज परिवार के बहादुर चौधरी ने बताया – गंगा के बढ़ने के बाद एक फर्श बचा हुआ है। जिसमें शवदाह हो रहा है। पानी बढ़ने के बाद यहां गलियों में शवदाह होगा। इसमें गन्दगी के साथ ही साथ मलबा पड़ा हुआ है। हर वर्ष नगर निगम यहां सफाई करता है लेकिन आज तक इसकी सफाई नहीं की गई। जबकि अगले कुछ घंटे में यहां शव जलाना शुरू हो जाएगा। लेकिन यहां साफाई नहीं कराई गई है। हमारी मांग है कि नगर निगम यहां समय रहते मलबा और कचरा की सफाई करवा दें। स्थानीय लोग और कॉरिडोर का मलबा बहादुर चौधरी ने बताया – यह मलबा कुछ स्थानीय लोगों ने फेंक दिया है। तो कुछ मलबा कॉरिडोर का है। जिसे यहां रखा गया है। ऐसे में नगर निगम से यही अपील है कि इस मलबे को हटाया जाए। ताकि शवदाह करने में किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। नगर निगम को करवानी होगी सफाई डोमराजा परिवार के विक्रम चौधरी ने बताया – पानी बढ़ने के बाद हर वर्ष सीढ़ियों से होता हुआ शवदाह हम लोगों के घरों के पास होने लगता है। अंतिम सीढ़ी पर शवदाह हो रहा है। इसके बाद ऊपर गलियों में चिता सजाई जा रही है। एक शव जलने में दो से ढाई घंटे का समय लगता है। निगम द्वारा सफाई तो कराई जाती है लेकिन गली में जहां बॉडी जलती है। वहां सफाई नहीं हुई है। आज तक नहीं रुका शवदाह विक्रम ने बताया – बाढ़ में आस-पास हर जगह के शमशान घाट बंद हो जाते हैं। लेकिन वाराणसी के हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट पर 24 घंटे, 12 महीने शवदाह होता रहता है। लोग यहां आते हैं और कभी यहां शवदाह नहीं रुका है।



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