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शरीर में सामान्य से करीब 60% कम हीमोग्लोबिन और 95% से अधिक प्लेटलेट्स की कमी के बावजूद एस.एन. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने एक गंभीर प्रसूता और उसके नवजात की जान बचा ली। प्रसूता का हीमोग्लोबिन महज 4.5 ग्राम/डेसीलीटर और प्लेटलेट्स केवल 7 हजार थे। अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा होने के बीच अस्पताल में तत्काल प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं थीं। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. पियूष ने स्वयं प्लेटलेट्स दान किए, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने बिना देर किए आपातकालीन सीज़ेरियन ऑपरेशन कर मां और नवजात दोनों को सुरक्षित बचा लिया। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग (ओबीजीवाई) विभाग ने एक अत्यंत जटिल और हाई-रिस्क प्रसूता का सफलतापूर्वक आपातकालीन सीज़ेरियन ऑपरेशन कर मां और नवजात दोनों की जान बचाई। अस्पताल के अनुसार महिला को अवरुद्ध प्रसव (ऑब्स्ट्रक्टेड लेबर), गंभीर एनीमिया और प्लेटलेट्स की अत्यधिक कमी की स्थिति में भर्ती कराया गया था। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और तत्काल ऑपरेशन करना जरूरी था। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऑपरेशन के समय न तो पर्याप्त रक्त उपलब्ध था और न ही प्लेटलेट्स, जबकि मरीज के साथ कोई रक्तदाता भी मौजूद नहीं था। समय बेहद कम था और किसी भी देरी से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा हो सकता था। ऐसे में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. पियूष ने मानवता और सेवा भावना का परिचय देते हुए स्वयं प्लेटलेट्स दान किए। इसके बाद डॉ. साताक्षी, डॉ. गीतिका, डॉ. आयुषी और डॉ. अंशु गौतम की टीम ने सफलतापूर्वक आपातकालीन सीज़ेरियन ऑपरेशन किया। इस जटिल मामले के सफल उपचार में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का मार्गदर्शन रहा। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शिखा सिंह, डॉ. उर्वशी, डॉ. दिव्या यादव, एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. अमृता, ब्लड बैंक और नर्सिंग स्टाफ ने समन्वय के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी विभागों की त्वरित कार्रवाई, बेहतर तालमेल और टीमवर्क की बदौलत मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ हो रहे हैं। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि गंभीर परिस्थितियों में समय पर लिया गया निर्णय, विशेषज्ञता और टीमवर्क ही इस ऑपरेशन की सफलता का सबसे बड़ा कारण रहा। यह मामला चिकित्सकीय दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता का भी उदाहरण बनकर सामने आया है।
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