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अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में अब एक नया और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कथित ‘क्लोन चेक’ का मामला भी जांच के दायरे में आया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसे फिलहाल जांच का विषय बताया है। तीन बैंक खातों की भी हो रही पड़ताल सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तीन बैंक खातों में से किसी खाते से क्लोन चेक के जरिए धन निकालने का प्रयास या वित्तीय जालसाजी तो नहीं हुई। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो मामला सिर्फ चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय सुरक्षा में सेंध तक पहुंच सकता है। 2020 में भी हुआ था क्लोन चेक फ्रॉड राम मंदिर ट्रस्ट पहले भी क्लोन चेक धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। सितंबर 2020 में फर्जी चेक के जरिए दो बार कुल छह लाख रुपये निकाल लिए गए थे। तीसरे फर्जी चेक से 9.86 लाख रुपये निकालने की कोशिश नाकाम रही। बाद में बैंक ने पूरी छह लाख रुपये की राशि ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कर दी थी। इसके बाद ट्रस्ट ने चेक की जगह आरटीजीएस और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों को प्राथमिकता दी थी। सात आरोपियों पर धाराएं बढ़ाने की तैयारी चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज आठ आरोपियों में से सात पर गंभीर धाराएं बढ़ाने की तैयारी है। वहीं पूर्व गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ केवल षड्यंत्र की धारा लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान छह आरोपियों ने चोरी स्वीकार की है, जबकि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने खुद को निर्दोष बताया है। टिन्नू की संपत्ति और रिश्तेदारों की भी जांच पुलिस रिमांड के दौरान टिन्नू यादव को कई स्थानों पर ले जाकर पूछताछ की गई। उसके घर से शेयर बाजार से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। वहीं पुलिस ने उसके चारपहिया और दोपहिया वाहन जब्त किए हैं। हालांकि पूर्व गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव से अब तक कोई बरामदगी नहीं हुई है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी उन्हें कथित षड्यंत्रकारी बताया गया है। वीडियो वायरल होने से शुरू हुआ था पूरा मामला मामले की शुरुआत 5 जून को आरोपी अविनाश शुक्ला के घर का वीडियो सामने आने के बाद हुई थी। इसके बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंचा। भाजपा नेता की शिकायत पर सरकार ने 13 जून को एसआईटी गठित की। 25 जून को ट्रस्ट की ओर से आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अब अदालत ने नए सिरे से जांच के निर्देश देते हुए सभी पक्षों को मामले का राजनीतिकरण करने से बचने की हिदायत दी है।
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