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गोरखपुर के बेलीपार थाना क्षेत्र के निवासी अर्जुन जायसवाल और उनके परिवार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई एक आवासीय मकान और तीन वाहनों को कुर्की से मुक्त करने का आदेश दिया है। जानिये क्या है मामला पुलिस थाना बेलीपार, गोरखपुर की रिपोर्ट पर वर्ष 2020 में अर्जुन जायसवाल के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके आधार पर जिला मजिस्ट्रेट, गोरखपुर ने जनवरी 2021 में धारा 14(1) के तहत उनकी और परिवार के सदस्यों की कुछ संपत्तियां कुर्क कर दी थीं। इसमें गाटा संख्या 206 पर बना पक्का मकान और तीन चार-पहिया वाहन शामिल थे। बाद में विशेष न्यायाधीश, गैंगस्टर एक्ट, गोरखपुर ने भी नवंबर 2022 में इस कुर्की को बरकरार रखा था, जिसके विरुद्ध यह अपील दाखिल की गई थी। अर्जुन जायसवाल ने दलील दी कि संपत्तियां पैतृक हैं, परिवार के पास लगभग 150 बीघा पुश्तैनी कृषि भूमि रही है, और राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण में भूमि अधिग्रहण पर सरकार से मुआवजा भी मिला था। वाहन ऋण लेकर खरीदे गए थे और उनके भाई व रिश्तेदारों के नाम पंजीकृत थे, जो अपने वैध व्यवसाय से आय अर्जित करते थे। उनका कहना था कि दस आपराधिक मामलों में से किसी में भी उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है, और महज आपराधिक इतिहास के आधार पर संपत्ति को अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने क्या कहा जानिये हाईकोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 के तहत कुर्की का अधिकार एक असाधारण शक्ति है, जिसका प्रयोग तभी किया जा सकता है जब संपत्ति और अपराध की आय के बीच स्पष्ट व प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने वाले ठोस साक्ष्य मौजूद हों। कोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक पृष्ठभूमि होने से यह नहीं माना जा सकता कि हर संपत्ति अपराध की कमाई से अर्जित की गई है। पीठ ने पाया कि अभियोजन पक्ष इस बात का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका कि मकान या वाहन किसी विशिष्ट अपराध की आय से खरीदे गए थे। इसके विपरीत, परिवार ने राजस्व अभिलेख, बैंक स्टेटमेंट, मुआवजा दस्तावेज़, ऋण भुगतान रिकॉर्ड और आयकर रिटर्न सहित पर्याप्त दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत किए था। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश के आदेश को साक्ष्य के बजाय अनुमान पर आधारित मानते हुए गाटा संख्या 206 स्थित मकान तथा तीन वाहनों की कुर्की रद्द कर दी और उन्हें उनके वैध स्वामियों को सौंपने का निर्देश दिया। हालांकि, राम शरण निषाद के नाम पंजीकृत वाहन (UP 53 AB 5305) की कुर्की बरकरार रखी गई, क्योंकि उसके स्वामी ने न तो कोई आपत्ति दाखिल की और न ही कोर्ट में उपस्थित हुए। इस प्रकार अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया।



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