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राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चा फर्श पर गिर गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने यह कहते हुए हंगामा किया कि जब हम मां को लाए तो कहा गया कि इंतजार करो। जब लेबर पेन होगा तभी नॉर्मल डिलीवरी कराई जाएगी। बच्चे के पिता ने कहा- पत्नी की पहली प्रेग्नेंसी थी। लड़का हुआ था। मामला कानपुर रोड स्थित लोकबंधु राजनारायण संयुक्त अस्पताल का है। आशियाना की सीता विहार कॉलोनी के शुभम अपनी गर्भवती पत्नी को रविवार शाम लेबर पेन होने पर अस्पताल पहुंचे थे। शुभम ने कहा- यहां सफाई करने वाली ने मुझसे डिलीवरी करने के 500 रुपए मांगे थे। उसने कहा था कि डॉक्टर 50 रुपए देते हैं, आप 500 दीजिए, हम डिलीवरी करा देते हैं। बच्चे के पिता का आरोप पढ़िए- डॉक्टर बोले सीजर की व्यवस्था नहीं है बच्चे के पिता शुभम पाल ने बताया- बच्चे की मां को जब लेबर पेन हुआ तो मैं उसे यहां लेकर आया। शाम करीब 4 बजे लेकर आया। यहां पर उसी समय उनको एडमिट कर लिया गया। उसके बाद फिर से लेबर पेन का ये लोग इंतजार करते रहे कि पेन होगा तभी डिलीवरी करेंगे। भर्ती करते समय डॉक्टरों ने कहा था कि एडमिट कर रहे हैं। लेबर पेन होने पर नॉर्मल डिलीवरी कराएंगे, अगर जरूरत पड़ी तो सीजर भी कर सकते हैं। 5 घंटे भी नॉर्मल डिलीवरी नहीं हो पाई और मेरी पत्नी थक चुकी थी। मैंने कहा कि आप लोग सीजर ही कर दीजिए तो डॉक्टरों ने कहा कि हमारे पास सीजर की व्यवस्था नहीं है। मैंने डायरेक्टर से यही बात जाकर कही तो उन्होंने कहा कि सीजर की पूरी व्यवस्था है। डायरेक्टर को मैंने लिखित शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि हम इसकी जांच करेंगे। आपको न्याय मिलेगा। मैंने डायरेक्टर से पूछा कि वहां ड्यूटी पर डॉक्टर हैं या इंटर्न, तो उनको नहीं पता था कि ड्यूटी किसी लगी हुई है। मेरी मां को धक्का देकर लेबर रूम से बाहर निकाला मैंने पत्नी को रविवार शाम 4 बजे भर्ती कराया था। उसके बाद दोबारा में लेबर पेन शनिवार को तड़के 4 बजे शुरू हुआ। उस समय से लेकर सुबह साढ़े आठ बजे तक लेबर रूम ले जाकर नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश की जाने लगी। उस दौरान डिलीवरी रूम में मेरी मां भी थीं। उनको इन लोगों ने धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। उस समय वहां पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। जो सफाई कर्मचारी थी, वो कह रही थी कि डॉक्टर साहब मुझको 50 रुपए देते हैं, आप 500 रुपए दे दीजिए, डिलीवरी करा देती हूं। घटना के बाद भी डॉक्टर नहीं आईं शुभम ने बताया कि गर्भवती कीर्ति की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। आखिरकार प्रसव हो गया। इस दौरान बच्चा फर्श पर गिर गया, जिससे उसके सिर पर चोट आ गई। घटना के बावजूद डॉक्टर वार्ड में मरीज को देखने तक नहीं आई। घरवालों ने जब वार्ड में हंगामा शुरू किया तब कुछ स्टाफ नर्स और कर्मचारी पहुंचे। परिवारीजनों ने मांगी सीसीटीवी फुटेज परिवारीजनों का आरोप है कि डॉक्टर मृत शिशु को कागजी कार्रवाई के बाद घर भेजने पर अमादा था। शुभम ने शव लेने से इन्कार कर दिया। वह शव का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए अड़ गए। हंगामे की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों की मांग के बाद पुलिस ने शिशु के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान शुभम ने अस्पताल प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज की भी मांग की है। डायरेक्टर बोले- जांच कमेटी गठित, सबके बयान होंगे लोकबंधु अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। समिति परिजनों की लिखित शिकायत और लगाए गए आरोपों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। मरीज के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और प्रसव की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। समिति को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ने संज्ञान लिया, 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी नवजात की मौत के मामले में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया है। उन्होंने 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की है। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को जांच का आदेश दिया। कहा है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता में गर्भवती और प्रसूताओं को बेहतर इलाज शामिल है। इसमें लापरवाही करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मौत मामले में जांच शुरू लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय के लेबर रूम में प्रसव के दौरान नवजात के फर्श पर गिरने से हुई मौत के मामले की तीन स्तर पर जांच शुरू हो गई है। अस्पताल प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मंगलवार को घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की गई। दूसरी ओर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम मृत्यु के कारणों का अलग से विश्लेषण कर रही है। वहीं परिवार कल्याण महानिदेशालय की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक डॉ. स्वदेश कुमारी ने भी अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की समीक्षा की। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों इसे हुई पूछताछ अस्पताल प्रशासन की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने मंगलवार को घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद तीन महिला डॉक्टरों से अलग-अलग पूछताछ की। इसके अलावा स्टाफ नर्स, वार्ड कर्मियों और प्रसव के दौरान मौजूद अन्य कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए गए। समिति ने यह जानने का प्रयास किया कि प्रसव के समय क्या परिस्थितियां थीं, किसकी क्या जिम्मेदारी थी और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं। जांच समिति ने मरीज की केस शीट, इलाज संबंधी रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और प्रसव से जुड़े अन्य दस्तावेज भी अपने कब्जे में लेकर उनका परीक्षण शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि परिजनों की लिखित शिकायत और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। नवजात के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की अलग टीम भी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसमें यह अध्ययन किया जा रहा है कि शिशु की मौत का वास्तविक कारण क्या था? क्या प्रसव के दौरान हुई घटना का उससे सीधा संबंध था? विशेषज्ञों की राय भी जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाई जाएगी। कल तक जांच पूरी होने की उम्मीद मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवार कल्याण महानिदेशालय की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक डॉ. स्वदेश कुमारी ने भी अस्पताल पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की और अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। निदेशक ने जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तीनों स्तर की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी डॉक्टर, नर्स या अन्य कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ———————- ये खबर भी पढ़िए- बेली अस्पताल में भर्ती मरीज गेट पर मृत मिला : पोस्टमार्टम में सिर में चोट के निशान मिले, प्रयागराज में घरवाले बोले- पीट-पीटकर हत्या की गई प्रयागराज के बेली अस्पताल में भर्ती 42 वर्षीय मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रविवार रात तक अस्पताल में भर्ती रहे कीडगंज के मलाकराज निवासी मनोज सोमवार सुबह अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर अचेत अवस्था में मिले। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने अस्पताल के अंदर मारपीट कर हत्या करने और साक्ष्य मिटाने के लिए शव बाहर फेंकने का आरोप लगाया है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। (पूरी खबर पढ़िए)
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