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गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में निचली अदालत के फैसले को मंगलवार को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है। इन 38 दोषियों में उत्तर प्रदेश के आठ और आजमगढ़ जिले के छह दोषी शामिल हैं। अहमदाबाद की स्पेशल कोर्ट ने फरवरी 2022 में इस मामले में फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सभी दोषियों ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने सभी अपीलों को खारिज करते हुए स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) से जुड़े दोषियों की सजा को उचित माना। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 56 मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा 200 से अधिक घायलों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने कहा कि मुआवजा राशि का भुगतान 30 मार्च 2027 तक किया जाए। 70 मिनट में हुए थे 21 धमाके 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 एफआईआर दर्ज की गई थीं। सूरत में कई स्थानों से जिंदा बम भी बरामद हुए थे। गोधरा कांड के बाद की थी साजिश जांच एजेंसियों के अनुसार, यह साजिश प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े आतंकियों ने रची थी। धमाकों से कुछ मिनट पहले मीडिया संस्थानों को एक ई-मेल भेजकर हमलों की जिम्मेदारी ली गई थी। जांच में सामने आया कि 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के प्रतिशोध के रूप में इन धमाकों को अंजाम दिया गया था। 19 दिन में 30 आरोपी गिरफ्तार जांच के दौरान विशेष टीम ने महज 19 दिनों में 30 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद अन्य आरोपियों को देश के विभिन्न राज्यों से पकड़ा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी मॉड्यूल ने इससे पहले जयपुर और वाराणसी में भी सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया था। अहमदाबाद ब्लास्ट के अगले दिन सूरत में भी बम विस्फोट की कोशिश की गई थी, लेकिन टाइमर में खराबी के कारण बम फट नहीं सके। यूपी के आठ दोषी, छह आजमगढ़ के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में उत्तर प्रदेश के आठ लोगों को दोषी ठहराया गया था, जिनमें छह आरोपी आजमगढ़ जिले के रहने वाले हैं। वहीं, इस मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।



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