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बरेली साइबर क्राइम पुलिस ने मंगलवार को एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों को किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराता था। आरोपी की गिरफ्तारी सेना की अधिकारी बनकर प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री के नाम पर 9.08 लाख रुपये की ठगी के मामले में हुई है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर पीड़ित के 3.54 लाख रुपये वापस करा दिए हैं, जबकि शेष रकम की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में फरीदपुर की ताज कॉलोनी निवासी रामप्रताप से एक महिला ने संपर्क किया था। उसने खुद को सेना की अधिकारी बताकर प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री का झांसा दिया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 9.08 लाख रुपये जमा करा लिए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच में खुला राज जांच के दौरान पता चला कि ठगी की रकम जिन खातों में भेजी गई थी, वे मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खुलवाए गए थे। इसी आधार पर पुलिस ने बिहार निवासी चंदन कुमार दास को गिरफ्तार किया। मामले का एक अन्य आरोपी मनीष दास पहले ही अदालत में आत्मसमर्पण कर चुका है। मजदूरों के नाम पर खुलवाए 14 बैंक खाते पूछताछ में चंदन कुमार दास ने बताया कि गुरुग्राम में डिलीवरी का काम करने के दौरान उसकी मुलाकात ‘राज’ नाम के व्यक्ति से हुई थी। उसने अधिक पैसे कमाने का लालच देकर मजदूरों के बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराने के लिए कहा। आरोपी ने बताया कि प्रत्येक बैंक खाते के बदले उसे पैसे मिलते थे। उसने बिहार समेत अन्य राज्यों के करीब 14 लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं, उसने अपना बैंक खाता भी उनके इस्तेमाल के लिए दे दिया था। खाते फ्रीज होने पर हुआ ठगी का पता चंदन ने पुलिस को बताया कि जब बैंक खाते फ्रीज होने लगे और पुलिस उसकी तलाश में पहुंची, तब उसे पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। गिरोह के सरगना की तलाश जारी साइबर क्राइम थाना पुलिस का कहना है कि ठग अपनी पहचान छिपाने के लिए सीधे अपने बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वे गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के नाम पर खुलवाए गए खातों के जरिए ठगी की रकम का लेनदेन करते हैं। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य संचालक ‘राज’ और उससे जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।



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